➤ लोक अदालतों से 6.81 लाख लंबित राजस्व मामलों का निपटारा
➤ इंतकाल, तकसीम और निशानदेही समेत राजस्व रिकॉर्ड की दुरुस्ती के मामले हुए हल
➤ लोक अदालतों के बावजूद मामले लंबित रहे तो जिला उपायुक्तों की जवाबदेही तय होगी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोगों को राजस्व मामलों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देने के लिए सरकार ने अब जिला उपायुक्तों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि राजस्व लोक अदालतों और विशेष राजस्व लोक अदालतों के बावजूद यदि मामलों का समयबद्ध निपटारा नहीं होता है, तो संबंधित जिलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार के अनुसार, प्रदेश में लंबित राजस्व मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई विशेष पहल के तहत अब तक करीब 6.81 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इनमें बड़ी संख्या में इंतकाल, तकसीम और निशानदेही से जुड़े मामले शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को पारदर्शी, जवाबदेह और उत्तरदायी प्रशासन उपलब्ध कराना है। खासकर भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों का सीधा संबंध आम लोगों, परिवारों और भूमि मालिकों के अधिकारों से होता है। इसलिए इन मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं होगा।
6.81 लाख मामलों का हुआ निपटारा
राजस्व लोक अदालत और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से अब तक करीब 6,81,000 लंबित मामलों का समाधान किया गया है।
इनमें सबसे अधिक 5,44,000 से ज्यादा इंतकाल के मामले शामिल हैं। इसके अलावा करीब 47,333 तकसीम और 63,000 से अधिक निशानदेही के मामलों का भी निपटारा किया गया है।
राजस्व अभिलेखों से संबंधित 26,288 दुरुस्तियां भी की गई हैं। सरकार का कहना है कि इस व्यापक अभियान के कारण प्रदेश में लंबित राजस्व मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
अक्तूबर 2023 से लग रही राजस्व लोक अदालतें
प्रदेश में अक्तूबर 2023 से हर महीने के अंतिम दो दिनों में तहसील और उपतहसील मुख्यालयों पर राजस्व लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है।
इन अदालतों का उद्देश्य लोगों के भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों को स्थानीय स्तर पर ही जल्द से जल्द निपटाना है। इससे लोगों को लंबे समय तक कार्यालयों में आवेदन और दस्तावेज लेकर भटकने से राहत मिली है।
सरकार के मुताबिक, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस व्यवस्था का विशेष फायदा हुआ है। पहले भूमि संबंधी मामलों के समाधान के लिए लोगों को कई बार तहसील और अन्य राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
जनवरी 2026 से विशेष राजस्व लोक अदालतें
राजस्व मामलों के तेजी से निपटारे के लिए सरकार ने जनवरी 2026 से विशेष राजस्व लोक अदालतों की व्यवस्था भी शुरू की है। इनका आयोजन हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को किया जा रहा है।
इन विशेष अदालतों में खास तौर पर तकसीम और राजस्व दस्तावेजों में सुधार से जुड़े मामलों का निपटारा किया जाता है। नियमित और विशेष लोक अदालतों के कारण लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिली है।
समय और पैसे दोनों की बचत
राजस्व मामलों का सीधा संबंध जमीन, मकान और संपत्ति के अधिकारों से होता है। ऐसे मामलों के लंबित रहने से लोगों को न केवल मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि बार-बार सरकारी कार्यालयों तक आने-जाने में समय और पैसा भी खर्च होता है।
लोक अदालतों के माध्यम से अब लोगों को अपने मामलों के समाधान के लिए एक निर्धारित मंच मिल रहा है। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के भूमि मालिकों को राहत मिली है।
सरकार का मानना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड समय पर दुरुस्त हों और इंतकाल, तकसीम तथा निशानदेही जैसे मामलों का जल्द निपटारा हो, तो जमीन से जुड़े विवादों और अनावश्यक प्रशासनिक देरी को भी कम किया जा सकता है।
लंबित मामलों पर अब तय होगी जिम्मेदारी
सरकार को अभी भी प्रदेश के कई क्षेत्रों से राजस्व मामलों के समय पर निपटारे में देरी की शिकायतें और सूचनाएं मिल रही हैं। लोक अदालतों के माध्यम से बड़े स्तर पर मामलों के निपटारे के बावजूद यदि किसी जिले में मामले अनावश्यक रूप से लंबित रहते हैं, तो अब संबंधित जिला उपायुक्त की जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि लोक अदालतों और विशेष राजस्व अदालतों के माध्यम से लोगों को समयबद्ध समाधान उपलब्ध कराने की व्यवस्था को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र और वैध मामलों का निपटारा निर्धारित समय में हो।
लोगों को दफ्तरों के चक्कर से मिले राहत
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामले सीधे परिवारों और भूमि मालिकों के हितों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार आगे भी इन सुधारात्मक प्रक्रियाओं को जारी रखने की तैयारी में है, ताकि लोगों को अपने वैध मामलों के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
सरकार की कोशिश है कि राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जाए, जिससे लोगों के समय, धन और मेहनत की बचत हो और भूमि से जुड़े मामलों का समाधान निर्धारित समयसीमा में किया जा सके।



